Benefits Of Jatamansi In Hindi हैलो दोस्तों तो चलिए आज जानते है जटामांसी से रिलेटिड जानकारियां जो आज हम आपको इस पोस्ट में बताएंगे। वैसे तो सभी लोगों को पता होगा जटामांसी के बारे में लेकिन कुछ एक व्यक्ति ऐसे होंगे जिन्हें इसकी जानकारी नहीं होगी।
तो चलिए सबसे पहले यह जान लेते हैं कि ये जटामांसी है क्या और इससे क्या क्या फायदे होते हैं :–
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जटामांसी सहपुष्पी औषधि पौधा है। जिसका प्रयोग तीखे महक वाला इत्र बनाने में किया जाता है। इसको जटामांसी इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसके जड़ों में जटा या बाल जैसे तंतु लगे होते हैं। इनको बालझड़ भी कहते हैं।
जटामांसी का छोटा सुगन्धित शाक होता है। इसकी दो प्रजातियां गंधमांसी तथा आकाशमंसी होती है। बाजार में जो जटामांसी बिकती है, उसमें कई प्रकार की मिलावट रहती है। चरक-संहिता में धूपन द्रव्यों में जटामांसी का उल्लेख मिलता हे।
चलिए दोस्तों अब जानते हैं जटामंसी सेहोने वाले फायदों के बारे में। इससे हमें क्या क्या फायदें होते हैं:–
आजकल बालों की समस्या आम हो गई है। प्रदूषण, असंतुलन, आहार योजना तरह तरह के कॉज़्मेटिक्स के इस्तेमाल का प्रभाव बालों पर पढ़ता है और फिर सफेद बाल या गंजेपन की समस्या से जुझना पड़ जाता है। इसके लिए घरेलू उपाय के तौर पर समान मात्रा में जटामांसी, बला, कमल तथा कूठ को पीसकर सिर पर लेप करने से बालों का गिरना कम हो जाता है और असमय बालों का सफेद होना भी कम होता है।
अगर आपको काम के तनाव और भागदौड़ भरी जिंदगी की वजह से सिर दर्द की शिकायत रहती है तो बांस काजटामांसी उपाय बहुत लाभकारी सिद्ध होगा। जटामंसी को पीसकर या इसके पॉडर का मस्तिक पर लेप करने से सिर का दर्द कम हो जाता है।
आंख संबंधी बीमारियों में बहुत कुछ आता है जैसे – सामान्य आंख में दर्द, रतोंधी, आंख लाल होना आदि। पद्मकाठ, मुलेठी, जटामांसी तथा कालीयक को ठंडे जल में पीसकर छानकर उससे नेत्रों या आँखों को धोने से पित्त के कारण जो आँख संबंधी रोग होता है उसमें लाभ होता है।
जटामांसी चूर्ण से दांत को मंजने से मुंह की दुर्गंध दूर होती है। इसके अलावा जटामांसी का काढ़ा बनाकर गरारा करने से भी मुख से बदबू आना कम होता है।
मौसम बदला कि नहीं बच्चे से लेकर बड़े-बूढ़े सबको खांसी की शिकायत हो जाती है। मन शिला, हरताल, मुलेठी, नागरमोथा, जटामांसी तथा इंगुदी से धूमपान करने के बाद गुड़ युक्त गुनगुने दूध का सेवन करने से खांसी से राहत मिलती है। इसके अलावा जटामांसी का शर्बत बनाकर पिलाने से कफ संबंधी रोगों से राहत मिलती है।
आजकल की जीवनशैली और आहार का बुरा असर सेक्स लाइफ पर पड़ रहा है जिसके कारण सेक्स संबंधी समस्याएं होने लगी हैं। जटामांसी 10 भाग, दालचीनी तथा इलायची 8-8 भाग, कूठ, पोखरमूल, लौंग, कुंजन, सफेद मिर्च, नागरमोथा, सोंठ 6-6 भाग, बलसां 5 भाग केशर 4 भाग और चिरायता 10 भाग इन सबको मिलाकर अष्टमांश काढ़ा बनाकर 10-20 मिली मात्रा में पीने से वीर्य या स्पर्म संबंधी समस्या से राहत मिलती है।
जटामांसी औषधीय गुण खून को साफ साफ़ करके त्वचा संबंधी बीमारियों से राहत दिलाने में मदद करती है। जटामांसी के 10-15 मिली शीत कषाय में शहद मिलाकर पिलाने से खून साफ होता है।
बीमारी के लिए जटामांसी के सेवन और इस्तेमाल का तरीका पहले ही बताया गया है। अगर आप किसी ख़ास बीमारी के इलाज के लिए जटामांसी का उपयोग कर रहे हैं तो आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह ज़रूर लें। चिकित्सक के परामर्शानुसार :–
हालांकि, आपको किस प्रकार और कितनी मात्रा में जटामांसी का इस्तेमाल करना चाहिए, इस बारे में अधिक जानकारी के लिए डॉक्टर से बात कर लें।
जटामांसी का एक दवा के रूप में इस्तेमाल करना आमतौर पर स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित रहता है। हालांकि, इसके इस्तेमाल से कुछ लोगों को निम्न समस्याएं हो सकती हैं:–
हालांकि, गर्भवती महिलाओं या अन्य किसी रोग से ग्रसित व्यक्ति को जटामांसी से गंभीर साइड इफेक्ट्स भी हो सकते हैं।
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