Bakayan Tree Uses, Benefit, and Side Effects in Hindi यहां पर हम आपको बकायन के उपयोग, Bakayan ke labh और हानियां, के बारे मे बताने जा रहे हैं। बकायन के फल की उपेक्षा बकायन की छाल व फूल कम विषैले, बकायन के बीज (bakayan ke beej) सबसे अधिक विषैले और बकायन के ताजे पत्ते कम विषैले व नुकसान रहित होते है।
इस लिए इसके किसी भी भाग का उपयोग सावधानी पूर्वक करना चाहिए। इस पोस्ट मे हम आपको नीम के उपयोग, लाभ के बारे में बताने जा रहे है। इसके द्वारा हम अपने बहुत सारे रोगो को दूर कर सकते हे, बहुत सारी बीमारियों से हम बच सकते हे. इसका उपयोग शास्त्रों में लिखा हे, बहुत सारे रोगो में इसका इस्तेमाल होता हे. तो इस पोस्ट मे हम आपको नीम के उपयोग, लाभ के बारे में बताने जा रहे है।
शायद इस पेड़ को आपने कही सड़क के किनारे आपके लिए आपके रोगो के लिए खड़े आपकी पिर्तिशा करते देखा होगा या कहि किसी खेत में या जंगल में खड़ा आपने देखा होगा। इसका वैज्ञानिक नाम Melia azedarach L. होता है। बकायन का जो यह पेड़ हे यह वाकई ही गुड़कारी पौधा हे.
उत्तर भारत, पंजाब, तथा दक्षिण भारत मे बकायन के पेड़( Bakayan tree) पाये जाते है, ये हिमालय के निम्न प्रदेशो मे 2000-3000 फिट की उचाई तक होता है। बकायन का वृक्ष नीम की भाँति माध्यम आकार के होते है। यह 20 से 40 फिट ऊंचे होते है । फागुन और चैत्र मास मे bakayan tree से दूधिया रस निकलता है, ऐसी अवस्था में कोमल पत्तियो को छोड़ कर कोई भाग के क्वाथ अथवा रस का प्रयोग नही करना चाहिए।
दोस्तों सबसे पहले हम Bakayan ped के अनेक नामो के बारे में जान लेते इस का वैज्ञानिक नाम Melia azedarach L. है। ये meliaceae कुल का पेेेड़ है। अंग्रेजी में इसे Persian lilac, Bead tree कहते हैं। आम भाषा में इसे Bakayan Tree कहते हैं। इसे अलग अलग भाषाओ मे निम्न नामो से जाना जाता है।
| Language |
Bakayan Tree Name |
| हिंदी | – बकैन, महानीम, बकायन |
| संस्कृत | – माहनिम्ब, दरेक |
| गुजराती | -बकान, लिंमदो |
| मराठी | – बकाना निम्ब |
| बंगाली | – घोड़ा निम्ब |
| पंजाबी | – धरेक |
| फारसी | – आजाद दरख़्त |
| अरबी | – हरबित |
बकायन का बहुत ही ज्यादा गडकरी होता है इसके बहुत ज्यादा फायदे होते है इसके फायदे और उपयोग के बारे मैं हम आपको पूरी जानकारी दे रहे है जो आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकती है तो ये रहे बकायन के पेड़ के मुख्य फायदे और उपयोग।
1. बवासीर मे बकायन का उपयोग
इसके लिए बकायन के सूखे बीजो को कूटकर लगभग 3 ग्राम की मात्रा में प्रातः छाज या तजा पानी के साथ सेवन करने से खूनी-बादी दोनों बावासीर में अत्यंत लाभ होता हे ।
2. मुह के छालो में बकायन का उपयोग
इसके लीये बकायन की छल को उबाल कर उबले हुए पानी को छानकर उसमे फिटकरी मिला ले इसका कुल्ला करने से मुह के छाले समाप हो जायंगे ।
3. उबले हुए पानी में फिटकरी मिला क्र कुल्ला करने से मुह की बदबू और मसूड़ो में किसी भी पिरकार की समस्या से भी निजात मिलेगी यह बहुत ही गुड़कारी नुस्ख़ा हे ।
4. प्रदर में बकायन का उपयोग
इसके लिए बकायन के सूखे बीज आंवला सूखा और मुलेढि तीनो को बराबर मात्रा में लेकर पाउडर बना ले इसकी 1-1 चम्मच इसकी मात्रा सुबह शाम पानी के साथ ले इससे प्रदर की बीमारी यानि शवेत प्रदर की बीमारी दूर होगी ।
5. बकायन (bakayan) के सेवन से कुष्ट रोगों का इलाज किया जा सकता है
6. बकायन के सेवन से शवास रोगों का भी उपचार किया जाता है ।
बकायन (bakayan) से विभिन्न रोगों का उपचार किया जाता है।
7. बवासीर (अर्श) में बकैन के लाभ
इसके लिए बकायन के सूखे बीजो को बकायन के बीजो की गिरी तथा सौंफ बराबर मात्रा लेकर पीस ले । इसमे बराबर की मात्रा मे मिश्री मिला कर इसकी दो ग्राम की मात्रा दिन मे तीन बार सेवन करने से अर्श मे फायदे होते है । इसके 8 से 10 पके फल के बीज जो की जमीन पर गिर जाते है,
इन्हें लेकर पानी के साथ पीस कर झाड़ी बेर के आकार की गोली बना ले तथा छाया मे सुखाकर इसकी एक-एक गोली सुबह शाम बांसी जल के साथ सेवन करे, तथा एक गोली गुड़ के पानी के साथ घिस कर मस्सो पर लगाने से मस्से झड़ जाते है।
8. पेट के कीड़े में को मारने में उपयोगी
बकायन की 50 ग्राम ताजी छाल को कूट कर 300 मिली पानी मे क्वाथ बनाए जा जब चौथा हिस्सा रह जाये तो बच्चो को एक बड़ा चम्मच सुबह शाम 20 दिन तक पिलाने से आंत के कीड़े नष्ट हो जाते है।
9. मोतिया बिंद या दृष्टि कमजोर होना आदि नेत्र विकार में या आँखों के रोग में बकायन का उपयोग इसके लिये एक कि. ग्राम ताजे पत्ते पीस कर, निचोड़ कर रस निकाल ले, इस रस को पथ्थर के खरल मे घोट कर सुखा ले, दुबारा फिर दो बार खरल करे।
पीसते समय इसमे 3 ग्राम भीमसेनी कपूर मिला ले, इससे प्रातः शाम आंखों मे अंजन करने से मोतिबिन्द, तथा अन्य रोग जैसे आंखों मे लालिमा, आंखों से पानी निकलना, आंखों की कमजोरी, रोंहे आदि विकार दूर हो जाते ।
10. खुजली में बकायन का उपयोग
इसके लिए बकायन के 10 से 20 ग्राम फूलो को पीस कर लेप लगाने से त्वचा के फोड़े फुंसी, खुजली आदि रोग मिटते है ।
11 .कृमि संबंधित रोग में बकायन का उपयोग
इसके लिये बकायन के 8 से 10 सूखे फलों को 50ग्राम सिरके मे पीस कर त्वचा पर लगाने से त्वचा के कृमि संबंधित रोग मिटते है ।
12 . सिर की छोटी छोटी फुंसिया, पीप युक्त फुंसिया, सिर के चमड़े की पपडिया में उपयोगी बकायन
इसके लिए बकायन का 50 मिली रस को सिर पर लगाने से सिर की छोटी छोटी फुंसिया, पीप युक्त फुंसिया, सिर के चमड़े की पपडिया ठीक हो जाती है ।
13. गर्भाशय के रोग में बकायन का उपयोग के पेड़ के फायदे
इसके लिये बकायन को फूलो का 5 ग्राम रस की मात्रा एक चम्मच शहद के के साथ नियम पूर्वक सुबह शाम चाटने से मासिक धर्म की रुकावट दूर होती है ।
14. गर्भाशय की शुद्धि के लिए उपयोगी बकायन
इसके लिए बकायन की पत्ती के स्वारस रस की 10 ग्राम मात्रा मे अकरकरा के रस या चूर्ण की 3 ग्राम मात्रा मिला कर सुबह शाम खाली पेट पिलाने से लाभ होता है ।
15. अगर मासिक धर्म में उपयोगी बकायन
अगर आपको मासिक धर्म मे रक्त प्रवाह जरूरत से ज्यादा हो रहा हो तो इसके लिए बकायन की पत्ती के स्वारस की 5 ग्राम मात्रा देने से मासिक धर्म नियंत्रित होता है । अगर मासिक धर्म मे अवरोध हो तो वह भी इससे ठीक हो जाता है ।
16. चोट की गांठ व सूजन में उपयोगी
अगर आपके चोट की गांठ व सूजन में चोटिल स्थान पर रक्त जमने के कारण आयी सूजन हे तो इसके लिए बकायन के 10 से 20 पत्रो को पीस कर पुल्टिस बंधने से गाँठो का रक्त फैल कर लाभ होता है ।
17. गठिया में उपयोगी बकायन
इसके लिए बकायन के कुछे बीजो को सरसों के बीजो के साथ पीस कर लेप करने से गठिया मे लाभ मिलता है इसी और भी बहुत सी बीमारी में लाभकारी हे बकायन का पेड़ बहुत ही लाभकारी हे
बकायन का पेड़ ( bakayan tree in hindi) नीम की तरह छायादार तथा कड़वा होता है इसकी छाया फायदे मंद होती है, बकायन के पेड़ (bakayan tree ) के किसी भी अंग का प्रयोग सावधानी पूर्वक अच्छे डॉक्टर या वैध की सलाह से करना चाहये,
हमने बकायन के फायदे का वर्णन ऊपर किया है, उम्मीद करते है की आपको यह पोस्ट पसंद आया होगा अत्यन्त गंभीर रोगों मे इसका इस्तेमाल अच्छे डॉक्टर या वैध की सलाह से करें, धन्यवाद ।
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